चिरजीवौ वृषभानु दुलारी।
आगम निगम पुराण कहत हैं, विधि की सृष्टिन तें यह न्यारी॥ [1]
कीरति-कूख कल्पतरुवर भई, मनवांछित फल देत हैं प्यारी।
'लाड़िली-लाल' जन्म राधे कौ, सब ब्रज बजी है वधाई माईरी ॥ [2]
- श्री लाड़िली लाल
वृषभानु-महाराज की दुलारी राधा चिरंजीवी रहें—यही मंगल-कामना है। आगम-निगम और समस्त पुराण कहते हैं कि वे ब्रह्मा (विधि) की सामान्य सृष्टि से सर्वथा न्यारी हैं। [1]
कीर्ति-माता के गर्भ से प्रकट होकर वे श्रेष्ठ कल्पवृक्ष-सी हैं, जो सबको मनचाहा फल देती हैं। श्री लाड़िली-लाल जी कहते हैं कि श्री राधा के जन्मोत्सव से समस्त ब्रज में बधाइयों की गूंज उठी — “बधाई हो, माई!” [2]
आगम निगम पुराण कहत हैं, विधि की सृष्टिन तें यह न्यारी॥ [1]
कीरति-कूख कल्पतरुवर भई, मनवांछित फल देत हैं प्यारी।
'लाड़िली-लाल' जन्म राधे कौ, सब ब्रज बजी है वधाई माईरी ॥ [2]
- श्री लाड़िली लाल
वृषभानु-महाराज की दुलारी राधा चिरंजीवी रहें—यही मंगल-कामना है। आगम-निगम और समस्त पुराण कहते हैं कि वे ब्रह्मा (विधि) की सामान्य सृष्टि से सर्वथा न्यारी हैं। [1]
कीर्ति-माता के गर्भ से प्रकट होकर वे श्रेष्ठ कल्पवृक्ष-सी हैं, जो सबको मनचाहा फल देती हैं। श्री लाड़िली-लाल जी कहते हैं कि श्री राधा के जन्मोत्सव से समस्त ब्रज में बधाइयों की गूंज उठी — “बधाई हो, माई!” [2]

