बधाई आज श्री वृषभानु के द्वार।
नर नारी सब गावैं बजावैं, नाँचत दै-दै तार॥ [1]
प्रगटी कुँवरि किशोरी राधा, त्रिभुवन की सिरदार।
रसिक गोविन्द अभिराम श्याम की, जीवनि प्राण अधार॥ [2]
- श्री रसिक गोविंद
आज श्री वृषभानु जी के द्वार बधाइयों की गूँज है। स्त्री-पुरुष सब गाते-बजाते, ताल दे-देकर नाच रहे हैं। [1]
रसिक गोविन्द कहते हैं कि तीनों लोकों की स्वामिनी, श्यामसुन्दर के प्राणों की आधार — कुँवरि किशोरी श्री राधा प्रकट हुई हैं। [2]
नर नारी सब गावैं बजावैं, नाँचत दै-दै तार॥ [1]
प्रगटी कुँवरि किशोरी राधा, त्रिभुवन की सिरदार।
रसिक गोविन्द अभिराम श्याम की, जीवनि प्राण अधार॥ [2]
- श्री रसिक गोविंद
आज श्री वृषभानु जी के द्वार बधाइयों की गूँज है। स्त्री-पुरुष सब गाते-बजाते, ताल दे-देकर नाच रहे हैं। [1]
रसिक गोविन्द कहते हैं कि तीनों लोकों की स्वामिनी, श्यामसुन्दर के प्राणों की आधार — कुँवरि किशोरी श्री राधा प्रकट हुई हैं। [2]

