गुण गावै गोपाल के भरि लावै दृग नीर - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (171)

गुण गावै गोपाल के भरि लावै दृग नीर - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (171)

गुण गावै गोपाल के, भरि लावै दृग नीर।
नारायण नहीं कल परै, बिन देखे बलबीर॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (171)

गोपाल के गुणों का कीर्तन करते-करते आँखें आँसुओं से भर जानी चाहिए — यही सच्ची भक्ति की पहचान है। श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि जब तक बलराम के भैया श्रीकृष्ण के दर्शन नहीं हो जाते, तब तक उनका हृदय एक क्षण के लिए भी शांत नहीं होगा।