रसशेखर रसराजवर, रस अनन्य हरिदास।
सुमिरत दर्शत मन हरत, रंग महल नित वास॥
- श्री प्रह्लाद जी
जो रस के शिरोमणि, रसराजवर (रस के परम सम्राट) एवं प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार-रस के अनन्य रसिक हैं — वे हैं श्रीस्वामी हरिदास जी। उनके स्मरण एवं दर्शन मात्र से मन प्रिया-प्रियतम के रस में मोहित हो उठता है। वे निधिवन के परम गोपनीय रंगमहल में नित्य निवास करते हैं।
सुमिरत दर्शत मन हरत, रंग महल नित वास॥
- श्री प्रह्लाद जी
जो रस के शिरोमणि, रसराजवर (रस के परम सम्राट) एवं प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार-रस के अनन्य रसिक हैं — वे हैं श्रीस्वामी हरिदास जी। उनके स्मरण एवं दर्शन मात्र से मन प्रिया-प्रियतम के रस में मोहित हो उठता है। वे निधिवन के परम गोपनीय रंगमहल में नित्य निवास करते हैं।

