ब्रजवासी नहीं सब देवता हैं - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’

ब्रजवासी नहीं सब देवता हैं - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’

(सवैया)
ब्रजवासी नहीं सब देवता हैं, यह भावना चित्त में ला रहे हैं।
चिरकाल प्रतीक्षा के बाद अहा! मम स्वामी समीप में आ रहे हैं ॥[1]
हरेकृष्ण ! चलो मत देर करो, दृग दर्शन को ललचा रहे हैं।
जिन्हें देखो वही कुछ भेंट लिये, बस नन्द के द्वार को जा रहे हैं॥ [2]

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’

ब्रजवासी साधारण लोग नहीं, सभी देवता ही हैं — ऐसी भावना हम हृदय में जागृत कर रहे हैं । दीर्घकाल की प्रतीक्षा के बाद, अब मेरे प्रभु धीरे-धीरे मेरे समीप आ रहे हैं! [1]

हे कृष्ण! अब देर मत करो, मेरे नेत्र तुम्हारे दर्शन के लिए व्याकुल हो उठे हैं। जिसे देखो, वह कोई न कोई भेंट लेकर नन्द बाबा के द्वार की ओर चला जा रहा है। [2]