वासी की आसा करौ, वासी हाथ विकाऊं ।
श्री वृन्दावन छाड़ि कै, अनत न कित हूँ जाऊँ ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (6)
मेरी आशा वृन्दावन-वासियों पर ही है, मैं अपने को उन्हीं के हाथ समर्पित करता हूँ । अब मैं श्री धाम वृन्दावन को त्याग कर कहीं नहीं जाऊँगा।
श्री वृन्दावन छाड़ि कै, अनत न कित हूँ जाऊँ ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (6)
मेरी आशा वृन्दावन-वासियों पर ही है, मैं अपने को उन्हीं के हाथ समर्पित करता हूँ । अब मैं श्री धाम वृन्दावन को त्याग कर कहीं नहीं जाऊँगा।

