चलु मन श्री वृन्दावन ओर - श्री संकेत अली, संकेत लता

चलु मन श्री वृन्दावन ओर - श्री संकेत अली, संकेत लता

चलु मन श्री वृन्दावन ओर ।
अनुपम धाम कामना पूरण, विहरत युगल किशोर ॥ [1]
षट् ऋतु रहत प्रत्यक्ष स्वच्छ जल, यमुना लेत हिलोर ।
प्रफुलित लता पता मृदु फल युत, खग ध्वनि नाचत मोर॥ [2]

- श्री संकेत अली, संकेत लता

हे मन! उस परम दिव्य वृन्दावनधाम की ओर चलो जो अद्वितीय है, और समस्त दिव्य कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। वहाँ युगल किशोर श्रीराधा-कृष्ण सदा नित्य विहार करते हैं। [1]

वहाँ छहों ऋतुएँ सदा एक साथ उपस्थित रहती हैं। स्वच्छ यमुना की जलधारा मधुरता से हिलोरें लेती है। वहाँ की लताएँ और पत्तियाँ सदा प्रफुल्लित रहती हैं, सुंदर फलों से लदी हुई हैं, पक्षी मधुर गीतों से वातावरण को रसमय बनाते हैं और मोर आनंदपूर्वक नृत्य करते हैं। [2]