श्री स्वामी हरिदास जी रसिक महा हरिव्यास  - श्री चरण दास

श्री स्वामी हरिदास जी रसिक महा हरिव्यास - श्री चरण दास

श्री स्वामी हरिदास जी, रसिक महा हरिव्यास।
कृष्णदास अरु हित अली, इन मारग सुखरास॥ [1]
सोई मेरौ मार्ग है, महा मोद की खान।
उन्नत परम निकुंज रस, तिन बानिन परमान॥ [2]

- श्री चरणदास

इस पद में श्री चरणदास जी ने नित्यविहारोपासक अनन्य रसिकों के मार्ग को ही अपना मार्ग बतलाया है -  

श्रीस्वामी हरिदास जी, हरिव्यास जी, श्रीकृष्णदास, एवं श्रीहित अलि (हरिवंश महाप्रभु) — ये सभी महान रसिक आचार्य हैं। इनके दिखाए हुए मार्ग में ही सुखों का सागर है। [1]

वही मार्ग मेरा भी मार्ग है — जो परमानंद की खान है, जो सीधे निकुंज-द्वार की ओर ले जाता है। उस परम-श्रेष्ठ निकुंज-रस की अनुभूति और सिद्धि स्वयं इन महापुरुषों की वाणियों में प्रमाण सहित प्रत्यक्ष प्रकट होती है। [2]