प्यारी प्रीतम सों लिख्यौं, मत परियौ मौ ध्यान - श्री दयाराम जी

प्यारी प्रीतम सों लिख्यौं, मत परियौ मौ ध्यान - श्री दयाराम जी

प्यारी प्रीतम सों लिख्यौं, मत परियौ मौ ध्यान ।
तुम मोसे ह्वै जाउगे, करिहों का पें मान ॥

- श्री दयाराम जी

प्यारीजू अपने प्रियतम को लिखती हैं कि तुम मेरा ध्यान न करना अन्यथा तुम भी मेरे जैसे हो जाओगे। फिर मैं मान किस पर करूँगी?