पाँडे माटी में सनैं - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (320)

पाँडे माटी में सनैं - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (320)

पाँडे माटी में सनैं, करमठ निपट निकोर।
प्रेम पदारथ क्यौं गहैं, अरुझे लहै न छोर॥

- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (320)

पंडित निपट-कोरे मिट्टी के समान इस कर्मकाण्ड में ऐसे उलझे रहते हैं जिसका कोई ओर-छोर ही नहीं है। ऐसे बाह्य आडम्बरों से युक्त कर्मकाण्डी लोग सर्वोच्च प्रेम पदार्थ को कैसे प्राप्त कर सकते हैं?