गहि गहि राधा कर कमल, झूमक नाचौं नाच।
राधा के पद कमल गहि, अखियन लाऊँ साँच॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (37)
श्री राधा के कोमल, कमल-से हाथों को बार-बार थामकर, झूमते हुए नाचूँ और चरणकमलों को सच्चे (शुद्ध) मन से अपने नेत्रों से लगाऊँ।
राधा के पद कमल गहि, अखियन लाऊँ साँच॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (37)
श्री राधा के कोमल, कमल-से हाथों को बार-बार थामकर, झूमते हुए नाचूँ और चरणकमलों को सच्चे (शुद्ध) मन से अपने नेत्रों से लगाऊँ।

