वंशीवट यमुना-निकट, जहाँ सघन घन छाँह ।
प्यारी मुख बिहसत भई, डारि गले पिय बाँह॥
- ब्रज के दोहे
श्री ललिता सखी कहती हैं — यमुना के सुरम्य तट पर स्थित वंशीवट पर, जहाँ सघन वृक्षों की छाया है, वहाँ श्रीराधा अपने मुख पर मधुर मुस्कान लिए खड़ी हैं, और प्रियतम श्रीकृष्ण ने उनके गले में अपनी बाँह डाल रखी है।
प्यारी मुख बिहसत भई, डारि गले पिय बाँह॥
- ब्रज के दोहे
श्री ललिता सखी कहती हैं — यमुना के सुरम्य तट पर स्थित वंशीवट पर, जहाँ सघन वृक्षों की छाया है, वहाँ श्रीराधा अपने मुख पर मधुर मुस्कान लिए खड़ी हैं, और प्रियतम श्रीकृष्ण ने उनके गले में अपनी बाँह डाल रखी है।

