तस्मात् सर्वात्मनारुद्र मत् प्रियांशरणं व्रजेत् - सनत्कुमार संहिता (36.172)

तस्मात् सर्वात्मनारुद्र मत् प्रियांशरणं व्रजेत् - सनत्कुमार संहिता (36.172)

तस्मात् सर्वात्मनारुद्र मत् प्रियांशरणं व्रजेत् ।
य आशु मत् प्रिया भूत्वा मां वशीकर्तु मिच्छति ।
इदं रहस्यं परमं मया ते परिकीर्त्तितम् ॥

- सनत्कुमार संहिता (36.172)

श्रीकृष्ण ने शिवजी से कहा — हे रुद्र! तुम मेरी प्रिया श्रीराधा की शरण में जाओ। जो श्री राधा की कृपा का पात्र बनता है, वह सहज ही मुझे अपने वश में कर लेता है। यह अत्यंत गोपनीय, परम गूढ़ रहस्य मैंने तुम्हें आज प्रकट किया है ।