प्रेम खेल सबसों कठिन खेलत कोउ सुजान - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (151)

प्रेम खेल सबसों कठिन खेलत कोउ सुजान - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (151)

प्रेम खेल सबसों कठिन, खेलत कोउ सुजान।
नारायण बिन प्रेम के, कहा प्रेम पहचान॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (151)

प्रेम का खेल सबसे कठिन है, जिसे कोई सच्चा सुजान ही खेल सकता है। श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि जिसने स्वयं भगवद् प्रेम-मार्ग का अनुभव ही नहीं किया, वह प्रेम की सच्ची महिमा, उसकी पहचान एवं उसका स्वरूप कभी समझ ही नहीं सकता।