बड़े बड़े नयन अरुण रत्नारे - श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (68)

बड़े बड़े नयन अरुण रत्नारे - श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (68)

बड़े बड़े नयन अरुण रत्नारे ।
छकनि छके रसमत्त उनींदे, नींदर घूम-घुमारे ॥ [1]
सुंदर इन्दु बदन अंबुज पर, दीपत रूप उजारे ।
अलबेलीअलि फिरै चपल गति, चंचल मद मतवारे ॥ [2]

- श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (68)

श्रीराधा के बड़े-बड़े नेत्र अरुण रत्नों जैसे लालिमायुक्त हैं। वे रस में ऐसे छके हुए है कि उनींदे-से प्रतीत होते हैं, मानो नींद उनकी पलकों के चारों ओर घूमती फिर रही हो। [1]

उनका चन्द्रमा समान मुख-कमल की आभा चारों ओर उजाला कर रही है। श्री अलबेली अलि कहती हैं कि उनके नेत्रों की गति इतनी चपल और चंचल है कि वे प्रेम-मद से भरे हुए अत्यंत मतवाले प्रतीत होते हैं। [2]