हमारी सुध लीजै हो मोहन प्यारे - श्री गुरु छौनाजी महाराज

हमारी सुध लीजै हो मोहन प्यारे - श्री गुरु छौनाजी महाराज

(राग सोरठ व विभास)
हमारी सुध लीजै हो मोहन प्यारे।
तुम बिन मेरे और न कोई, प्रीतम नन्द दुलारे ॥[1]
बहियाँ गहि की ओड़ निबाहो, भव सागर करि पारे।
'सखीछौना' को दरस दिखाओ, तरसत नैंन विचारे ॥ [2]

- श्री गुरु छौनाजी महाराज

हे मोहन प्यारे! मेरी सुध लो। हे नंद के दुलारे, प्रियतम प्यारे! तुम्हारे बिना मेरा कोई अन्य नहीं है! [1]

मेरे हाथ पकड़कर इस संसार रूपी सागर से पार करा दो।सखी छौना कहते हैं — कृपा कर मुझे अपने दर्शन करा दीजिए क्योंकि मेरे ये असहाय नेत्र आपके दर्शन के लिए व्याकुल हैं। [2]