ब्रजराज सों नाता जुड़ा अब है - ब्रज के सवैया

ब्रजराज सों नाता जुड़ा अब है - ब्रज के सवैया

(सवैया)
ब्रजराज सों नाता जुड़ा अब है, तब जग की क्या परवाह करें।
बस याद में रोते रहें उनकी, पलकों पर अश्रु प्रवाह करें॥ [1]
जितनी वह दूर रहें हम सौं, उतनी हम उनकी चाह करें।
सुख अद्भुत प्रेम की पीर में है, हम आह करें वे वाह करें॥ [2]

- ब्रज के सवैया

जब ब्रजराज श्रीकृष्ण से एक बार मेरा प्रेम-संबंध जुड़ ही गया है, तो मैं अब इस स्वार्थी संसार की व्यर्थ में चिंता क्यों करूँ? अब तो बस मैं उनकी मधुर स्मृति में आँसू बहाती रहूँ, और मेरी पलकें निरंतर उनकी याद में भीगी रहें। [1]

श्यामसुंदर चाहे मेरी जितनी भी उपेक्षा कर लें, मैं उनसे उतना ही अधिक प्रेम बढ़ाती रहूँ। उनके विरह की वेदना में भी एक अद्भुत, अलौकिक रस छिपा है। मेरी यही आशा है कि जब भी मैं प्रेम में आह भरूँ, वे उन्हें इतनी प्रिय लगें कि वे प्रसन्न होकर मुस्करा उठें और कहें — “वाह!” [2]