(सवैया)
धरा धाम में माधव ने इतना, किसी गोपिका को अपनाया नहीं ।
जिसे लेकर साथ अकेले गये, उस भेद को वेद ने पाया नहीं ॥ [1]
‘हरेकृष्ण’! विशेष रहस्य छिपा, शिव शेष के ध्यान में आया नहीं ।
समझा सब सारों का सार अतः, शुक व्यास ने नाम बताया नहीं॥ [2]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’
इस धराधाम पर श्रीकृष्ण ने किसी भी गोपी को उतना नहीं अपनाया, जितना उन्होंने उस एक गोपी (श्रीराधा) को अपनाया, जिन्हें अपने साथ वे रास में अकेले ले गए। इस रहस्य को वेद भी नहीं जान सके। [1]
श्री हरेकृष्ण जी कहते हैं — श्री राधा महारानी का विषय परम रहस्यमय है, जो इतना सूक्ष्म और गूढ़ है कि शिव और शेष जैसे महाज्ञानी भी अपने ध्यान में उसे नहीं ला पाते। इसी कारण, सब सारों का सार समझकर, शुकदेव और वेदव्यास जी ने उनका नाम (श्री राधा) स्पष्ट रूप से प्रकट नहीं किया। [2]
धरा धाम में माधव ने इतना, किसी गोपिका को अपनाया नहीं ।
जिसे लेकर साथ अकेले गये, उस भेद को वेद ने पाया नहीं ॥ [1]
‘हरेकृष्ण’! विशेष रहस्य छिपा, शिव शेष के ध्यान में आया नहीं ।
समझा सब सारों का सार अतः, शुक व्यास ने नाम बताया नहीं॥ [2]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’
इस धराधाम पर श्रीकृष्ण ने किसी भी गोपी को उतना नहीं अपनाया, जितना उन्होंने उस एक गोपी (श्रीराधा) को अपनाया, जिन्हें अपने साथ वे रास में अकेले ले गए। इस रहस्य को वेद भी नहीं जान सके। [1]
श्री हरेकृष्ण जी कहते हैं — श्री राधा महारानी का विषय परम रहस्यमय है, जो इतना सूक्ष्म और गूढ़ है कि शिव और शेष जैसे महाज्ञानी भी अपने ध्यान में उसे नहीं ला पाते। इसी कारण, सब सारों का सार समझकर, शुकदेव और वेदव्यास जी ने उनका नाम (श्री राधा) स्पष्ट रूप से प्रकट नहीं किया। [2]

