राधा भजति तं कृष्णं स च तां च परस्परम् ।
उभयोः सर्वसाम्यं च सदा सन्तो वदन्ति च ॥
- ब्रह्मवैवर्तपुराण, खण्डः 1 [प्रकृति खण्डः]/अध्यायः 48 / छंद 38 (1.48.38)
श्री राधा श्रीकृष्ण की उपासना करती हैं, और श्रीकृष्ण श्रीराधा की उपासना करते हैं — दोनों एक-दूसरे के आराध्य और आराधक हैं। संतजन सदा कहते हैं कि दोनों में पूर्ण समानता है अथवा कोई भेद नहीं है।
उभयोः सर्वसाम्यं च सदा सन्तो वदन्ति च ॥
- ब्रह्मवैवर्तपुराण, खण्डः 1 [प्रकृति खण्डः]/अध्यायः 48 / छंद 38 (1.48.38)
श्री राधा श्रीकृष्ण की उपासना करती हैं, और श्रीकृष्ण श्रीराधा की उपासना करते हैं — दोनों एक-दूसरे के आराध्य और आराधक हैं। संतजन सदा कहते हैं कि दोनों में पूर्ण समानता है अथवा कोई भेद नहीं है।

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