रतन-खचित वृदाविपुन, भूमि लता-द्रुम रंग ।
श्री स्वामी के लाडिले, रचे सुकेलि अनंग ॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (22)
श्रीधाम वृंदावन की दिव्य भूमि रत्नों से जड़ित है, जहाँ रंग-बिरंगी लताएँ और विविध रंगों के वृक्ष सौंदर्य बिखेर रहे हैं। उसी परम पावन भूमि पर श्री स्वामी हरिदास जी के लाड़ले श्यामा-कुंजबिहारी, प्रेम-केलि में उन्मत्त होकर नित्य विहार रस बरसा रहे हैं।
श्री स्वामी के लाडिले, रचे सुकेलि अनंग ॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (22)
श्रीधाम वृंदावन की दिव्य भूमि रत्नों से जड़ित है, जहाँ रंग-बिरंगी लताएँ और विविध रंगों के वृक्ष सौंदर्य बिखेर रहे हैं। उसी परम पावन भूमि पर श्री स्वामी हरिदास जी के लाड़ले श्यामा-कुंजबिहारी, प्रेम-केलि में उन्मत्त होकर नित्य विहार रस बरसा रहे हैं।

