चारि बदन मैं कह कहौं, सहसानन नहिँ जान ।
गाइ चरावत ग्वाल सँग, करत नंद की आन ॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
ब्रह्मा जी, श्रीकृष्ण से क्षमा याचना करते हुए कहते हैं — "हे प्रभु! आप ब्रज में गायें चराते रहते हो और नन्दबाबा की शपथ की दुहाई देते हो। आपकी इन अलौकिक लीलाओं को जब सहस्र (हज़ार) मुख वाले शेषनाग नहीं जान सके, तो फिर मैं चार मुख वाला ब्रह्मा कैसे गुणगान कर सकता हूँ?"
गाइ चरावत ग्वाल सँग, करत नंद की आन ॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
ब्रह्मा जी, श्रीकृष्ण से क्षमा याचना करते हुए कहते हैं — "हे प्रभु! आप ब्रज में गायें चराते रहते हो और नन्दबाबा की शपथ की दुहाई देते हो। आपकी इन अलौकिक लीलाओं को जब सहस्र (हज़ार) मुख वाले शेषनाग नहीं जान सके, तो फिर मैं चार मुख वाला ब्रह्मा कैसे गुणगान कर सकता हूँ?"

