महली की गति महली जानै, कहा जानै बाहर वारौ ।
नृप की रहन-सहन कहा जानै, भेड़ चरावन हारौ॥
- ब्रज के दोहे
श्री राधा महारानी के निज महल की श्री कृष्ण संग गोपनीय रस-लीलाओं को केवल महल में रहने वाली अंतरंग सहचरियाँ ही जानती हैं। बाहर वाले, जिनका उस रस में प्रवेश नहीं है, वे उस रहस्य को क्या जानें? यह तो वैसा ही है जैसे किसी राजा का रहन-सहन कोई साधारण चरवाहा कैसे समझ सकता है?
नृप की रहन-सहन कहा जानै, भेड़ चरावन हारौ॥
- ब्रज के दोहे
श्री राधा महारानी के निज महल की श्री कृष्ण संग गोपनीय रस-लीलाओं को केवल महल में रहने वाली अंतरंग सहचरियाँ ही जानती हैं। बाहर वाले, जिनका उस रस में प्रवेश नहीं है, वे उस रहस्य को क्या जानें? यह तो वैसा ही है जैसे किसी राजा का रहन-सहन कोई साधारण चरवाहा कैसे समझ सकता है?

