(कवित्त)
वृषभानु नन्दिनी दुरन्त की निकन्दिनी हैं,
नित्य नन्द नन्दन आनन्दिनी हैं राधिका। [1]
रूप रंग रस की सकल छवि छन्दिनी हैं,
गन्ध की मदिर मकरन्दिनी हैं राधिका ॥ [2]
कल्पना सृजन की हैं, कामना मिथुन की हैं,
स्फुरणा प्रणय की हैं, स्पन्दिनी हैं राधिका । [3]
प्रेरणा यजन की हैं भावना भजन की हैं,
अभिनन्दिनी हैं, विश्व वन्दिनी हैं राधिका ॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
वृषभानु-दुलारी श्री राधा दुरन्त (अत्यन्त कठिन) दुःख-मोह को नष्ट करने वाली हैं। वे नन्द-नन्दन (श्रीकृष्ण) को सदा आनन्द प्रदान करने वाली हैं। [1]
समस्त सौंदर्य, रंग और रस का मूर्तिमान स्वरूप हैं। वे सुगंध के मधुर मकरन्द की तरह मन को मोहित करने वाली हैं। [2]
वे सृष्टि की प्रेरक कल्पना हैं, प्रेम-संयोग की कामना हैं। वे प्रेम की सहसा जगने वाली स्फुरण और उसका स्पन्दन हैं। [3]
वे यज्ञ (पूजा आदि) की प्रेरणा, भजन का भाव हैं, और समस्त विश्व द्वारा अभिनंदन तथा वन्दनीय हैं। [4]
वृषभानु नन्दिनी दुरन्त की निकन्दिनी हैं,
नित्य नन्द नन्दन आनन्दिनी हैं राधिका। [1]
रूप रंग रस की सकल छवि छन्दिनी हैं,
गन्ध की मदिर मकरन्दिनी हैं राधिका ॥ [2]
कल्पना सृजन की हैं, कामना मिथुन की हैं,
स्फुरणा प्रणय की हैं, स्पन्दिनी हैं राधिका । [3]
प्रेरणा यजन की हैं भावना भजन की हैं,
अभिनन्दिनी हैं, विश्व वन्दिनी हैं राधिका ॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
वृषभानु-दुलारी श्री राधा दुरन्त (अत्यन्त कठिन) दुःख-मोह को नष्ट करने वाली हैं। वे नन्द-नन्दन (श्रीकृष्ण) को सदा आनन्द प्रदान करने वाली हैं। [1]
समस्त सौंदर्य, रंग और रस का मूर्तिमान स्वरूप हैं। वे सुगंध के मधुर मकरन्द की तरह मन को मोहित करने वाली हैं। [2]
वे सृष्टि की प्रेरक कल्पना हैं, प्रेम-संयोग की कामना हैं। वे प्रेम की सहसा जगने वाली स्फुरण और उसका स्पन्दन हैं। [3]
वे यज्ञ (पूजा आदि) की प्रेरणा, भजन का भाव हैं, और समस्त विश्व द्वारा अभिनंदन तथा वन्दनीय हैं। [4]

