श्री राधाप्यारी सुकुमारी, छबि पर मैं बलि जाऊँ।
लेकर कमल अधर धर बंसी, तेरो ही गुन गाऊँ ॥ [1]
कृपा तिहारी सो मैं श्यामा, राधा रमन कहाऊँ।
सरसमाधुरी सरबस मेरी, निरख नैन हुलसाऊँ ॥ [2]
- श्री सरस माधुरी
श्री कृष्ण कहते हैं — हे श्रीराधाप्यारी! हे सुकुमारी! आपकी मनोहर छवि पर मैं न्योछावर जाऊँ। मैं अपने अधरों पर बंसी धारण कर, तुम्हारे ही गुणों का गान करता हूँ। [1]
हे श्यामा! केवल आपकी कृपा से ही मुझे “राधारमण” नाम से पुकारा जाता है। श्री सरस माधुरी कहते हैं — हे प्यारीजू! आप ही मेरी सर्वस्व हो। आपके दर्शन पाकर ही मेरे नेत्र कृतार्थ होते हैं। [2]
लेकर कमल अधर धर बंसी, तेरो ही गुन गाऊँ ॥ [1]
कृपा तिहारी सो मैं श्यामा, राधा रमन कहाऊँ।
सरसमाधुरी सरबस मेरी, निरख नैन हुलसाऊँ ॥ [2]
- श्री सरस माधुरी
श्री कृष्ण कहते हैं — हे श्रीराधाप्यारी! हे सुकुमारी! आपकी मनोहर छवि पर मैं न्योछावर जाऊँ। मैं अपने अधरों पर बंसी धारण कर, तुम्हारे ही गुणों का गान करता हूँ। [1]
हे श्यामा! केवल आपकी कृपा से ही मुझे “राधारमण” नाम से पुकारा जाता है। श्री सरस माधुरी कहते हैं — हे प्यारीजू! आप ही मेरी सर्वस्व हो। आपके दर्शन पाकर ही मेरे नेत्र कृतार्थ होते हैं। [2]

