अनुछिन लालहु रहत हैं, सदा प्रिया आधीन ।
तेहि रस में सहचरि सकल, रहत मगन जिमि मीन॥
- श्री रामसखीजी महाराज, श्री भक्तिरस मंजरी, दोहा (92)
लालजी (श्रीकृष्ण) हर क्षण अपनी प्रिया (श्रीराधा) के अधीन रहते हैं। उसी भाव-रस में समस्त सहचरियाँ उसी प्रकार मग्न रहती हैं, जैसे मछलियाँ जल में तन्मय होकर लीन रहती हैं।
तेहि रस में सहचरि सकल, रहत मगन जिमि मीन॥
- श्री रामसखीजी महाराज, श्री भक्तिरस मंजरी, दोहा (92)
लालजी (श्रीकृष्ण) हर क्षण अपनी प्रिया (श्रीराधा) के अधीन रहते हैं। उसी भाव-रस में समस्त सहचरियाँ उसी प्रकार मग्न रहती हैं, जैसे मछलियाँ जल में तन्मय होकर लीन रहती हैं।

