देत सदा यमुना सुख राशि कों - श्री हित दामोदर दास, फुटकर वाणी (12)

देत सदा यमुना सुख राशि कों - श्री हित दामोदर दास, फुटकर वाणी (12)

(सवैया)
देत सदा यमुना सुख राशि कों नाम लियें यमुना श्रम ना।
यमुना हरि धाम कौ प्रापक कोविद शुद्ध सरूप जहाँ तम ना ॥ [1]
यमुना हित रस में हित दास दामोदर वारि विलोकि रहै भ्रम ना।
भनिये यमुना यमुना यमुना यमुना यमुना यमुना यमुना ॥ [2]

- श्री हित दामोदर दास, फुटकर वाणी (12)

श्री यमुना सदा असीम आनंद का दान देने वाली हैं, जिनका नाम (“यमुना”) इतना सहज है कि उसमें तनिक भी श्रम नहीं होता। यमुना हरि के धाम की प्राप्ति कराने वाली हैं, जो विशुद्ध ज्ञानस्वरूपिणी हैं, जो जीव के माया रूपी अंधकार का नाश करने वाली हैं । [1]

श्री हित दामोदर दास कहते हैं कि वे यमुना पर बलिहारी जाते हैं, जो सदा प्रेमरस में मग्न रहती हैं और दूसरों को भी उसी रस में डुबो देती हैं। जो भी यमुना को श्रद्धा से निहारता है, उसके मन में कभी कोई भ्रम नहीं रहता। इसलिए रटो — “यमुना, यमुना, यमुना, यमुना, यमुना, यमुना, यमुना!” [2]