ललित मोहिनी कुंज में दई पुंज दरसाय - श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (3)

ललित मोहिनी कुंज में दई पुंज दरसाय - श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (3)

ललित मोहिनी कुंज में, दई पुंज दरसाय ।
ठाकुर दासि नित सहचरी, सेवत हिय हुलसाय ॥ 

- श्री ठाकुर दास, श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (3)

श्री ललित मोहिनी कुंज में प्रिया-प्रियतम के रस-सौंदर्य के अपार पुंज का दर्शन उनकी कृपा से ही संभव हुआ है । ठाकुरदास कहते हैं — वहाँ सहचरियाँ प्रेमरस में पूर्णतः उन्मत्त होकर, श्री श्यामा कुंजबिहारी की निष्काम सेवा में सदा तत्पर रहती हैं।