प्रेम दिवाने जो भये, पलटि गयो सब रूप।
सहजो दृष्टि न आवई, कहा रंक कहा भूप॥
- श्री सहजो बाई
जो भगवान के प्रेम में दीवाने हो जाते हैं, उनके लिए संसार का दृष्टिकोण बदल जाता है। सहजोबाई कहती हैं — अब उन्हें राजा और रंक में कोई भेद दिखाई नहीं देता, सबमें केवल उनके प्रभु ही व्याप्त दिखाई देते हैं।
सहजो दृष्टि न आवई, कहा रंक कहा भूप॥
- श्री सहजो बाई
जो भगवान के प्रेम में दीवाने हो जाते हैं, उनके लिए संसार का दृष्टिकोण बदल जाता है। सहजोबाई कहती हैं — अब उन्हें राजा और रंक में कोई भेद दिखाई नहीं देता, सबमें केवल उनके प्रभु ही व्याप्त दिखाई देते हैं।

