गौर श्याम की कृपा बिन जानि सकै कोउ नाहिं - ब्रज के दोहे

गौर श्याम की कृपा बिन जानि सकै कोउ नाहिं - ब्रज के दोहे

गौर श्याम की कृपा बिन, जानि सकै कोउ नाहिं ।
कोटि जन्म तप होय किन, परसि सकै नहिं छाइँ ॥

- ब्रज के दोहे

गौर-श्याम वर्ण वाले दिव्य युगल श्री राधा-कृष्ण की कृपा के बिना, इस नित्य विहार रस को कोई भी जान नहीं सकता। प्राप्त करना तो बहुत दूर की बात है, चाहे कोई करोड़ों जन्मों तक तपस्या क्यों न करे, फिर भी इस रस की परछाईं तक उसे प्राप्त नहीं हो सकती।