करें भक्ति भगवंत की, कबहुं करै नहिं चूक।
हरि रस में राचो रहै, साँची भक्ति मलूक॥
- श्री मलूक दास
जो निरंतर सच्चे भाव से भगवान की भक्ति करता है और क्षण मात्र को भी अपने मन को श्री हरि से अलग नहीं करता, वही श्री हरि-रस में सदा मगन रहता है। श्री मलूक दास कहते हैं कि केवल यही सच्ची भक्ति कहलाती है।
हरि रस में राचो रहै, साँची भक्ति मलूक॥
- श्री मलूक दास
जो निरंतर सच्चे भाव से भगवान की भक्ति करता है और क्षण मात्र को भी अपने मन को श्री हरि से अलग नहीं करता, वही श्री हरि-रस में सदा मगन रहता है। श्री मलूक दास कहते हैं कि केवल यही सच्ची भक्ति कहलाती है।

