तन मन वचन प्रतीति सौं बसि वृन्दावन माँझ - श्री अनन्य अलि, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.105)

तन मन वचन प्रतीति सौं बसि वृन्दावन माँझ - श्री अनन्य अलि, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.105)

तन मन वचन प्रतीति सौं, बसि वृन्दावन माँझ ।
प्रेमी रसिक अनन्य कौ, संग करौ दिन साँझ ॥

- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.105)

देह, मन, वाणी और दृढ़ आंतरिक निश्चय सहित श्रीधाम वृन्दावन में वास करो। दिन-रात केवल अनन्य प्रेमी रसिकों का ही संग होना चाहिए, तभी वह अति दुर्लभ रस जीव को प्राप्त हो सकता है।