ब्रजमोहन उर अवनि में, राधा-सुपद-विहार ।
रोम रोम आनन्दघन, भीजे रसिक उदार ॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (75)
श्री कृष्ण के हृदय रूपी धाम में श्री राधा के सुंदर चरण सदा विहार करते हैं जिससे उनका रोम रोम आनंद से भीग जाता है।
रोम रोम आनन्दघन, भीजे रसिक उदार ॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (75)
श्री कृष्ण के हृदय रूपी धाम में श्री राधा के सुंदर चरण सदा विहार करते हैं जिससे उनका रोम रोम आनंद से भीग जाता है।

