लीला नित्य विहारको, ब्रह्मादिक ललचात ।
सुर नर मुनि जनकी सखी, कौन चलावे बात॥
- श्री सरस माधुरी
हे सखी! प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार रस का पान करने के लिए तो साक्षात ब्रह्मादिक भी ललचाते हैं — फिर सुर, नर, मुनि आदि की तो बात ही क्या करें!
सुर नर मुनि जनकी सखी, कौन चलावे बात॥
- श्री सरस माधुरी
हे सखी! प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार रस का पान करने के लिए तो साक्षात ब्रह्मादिक भी ललचाते हैं — फिर सुर, नर, मुनि आदि की तो बात ही क्या करें!

