विहरत कुंज कुटीर दोऊ श्री जमुना रस तीर - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (2)

विहरत कुंज कुटीर दोऊ श्री जमुना रस तीर - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (2)

विहरत कुंज कुटीर दोऊ, श्री जमुना रस तीर ।
नित्य विहार गंभीर गति, सुरति जुद्ध बलवीर ॥

- श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (2)

श्री राधा-कृष्ण दोनों श्री यमुना के रस-भरे तट पर कुंज-कुटीरों में नित्य विहार करते हैं। वहाँ प्रेम का अखण्ड, आनन्दमय क्रीड़ा-विलास प्रकट होता है — एक मधुर प्रेम युद्ध, जिसमें दोनों ही अपराजेय योद्धा हैं।