भीने अति रस रंग में, नवल रँगीले लाल।
बाहाँ जोरी चलत दोऊ, मत्त मरालनि चाल॥
- ब्रज के दोहे
नित्य नवीन युगल जोड़ी, श्री लाड़ली लाल, प्रेम-रस में सराबोर होकर, बाँहों में बाँहें डालकर, मत्त मराल की मोहक गति से विहरण कर रहे हैं।
बाहाँ जोरी चलत दोऊ, मत्त मरालनि चाल॥
- ब्रज के दोहे
नित्य नवीन युगल जोड़ी, श्री लाड़ली लाल, प्रेम-रस में सराबोर होकर, बाँहों में बाँहें डालकर, मत्त मराल की मोहक गति से विहरण कर रहे हैं।

