भटकत फिरत नाहक चित चलु तू ब्रज भू सकल अराम।
वृन्दावन मधुपुरी महावन बरसाने नंद ग्राम ॥ [1]
राधाकुण्ड गोवरधन यमुना पुलिन मनोहर धाम।
‘अलि संकेत’ सुखद दृग लखिये बिहरन श्यामाश्याम॥ [2]
- श्री संकेत अलि, संकेत लता (827)
हे मन! व्यर्थ भटकने का क्या लाभ? चलो — ब्रजभूमि की ओर, जो संपूर्ण शांति और आनंद का धाम है। वृंदावन, मथुरा, महावन, बरसाना और नंदगाँव — ये सब परमपावन स्थलों की ओर चलो। [1]
राधाकुंड, गोवर्धन, यमुना तट— ये सब अति मनोहर धाम हैं। श्री संकेत अलि कहते हैं — इन सुखद लीला स्थलों को निहारो, जहाँ श्याम–श्यामा विचरण करते हैं। [2]
वृन्दावन मधुपुरी महावन बरसाने नंद ग्राम ॥ [1]
राधाकुण्ड गोवरधन यमुना पुलिन मनोहर धाम।
‘अलि संकेत’ सुखद दृग लखिये बिहरन श्यामाश्याम॥ [2]
- श्री संकेत अलि, संकेत लता (827)
हे मन! व्यर्थ भटकने का क्या लाभ? चलो — ब्रजभूमि की ओर, जो संपूर्ण शांति और आनंद का धाम है। वृंदावन, मथुरा, महावन, बरसाना और नंदगाँव — ये सब परमपावन स्थलों की ओर चलो। [1]
राधाकुंड, गोवर्धन, यमुना तट— ये सब अति मनोहर धाम हैं। श्री संकेत अलि कहते हैं — इन सुखद लीला स्थलों को निहारो, जहाँ श्याम–श्यामा विचरण करते हैं। [2]

