यह तन यह वन जमुन तट मिल्यौ वन्यौ है दाउ - श्री हित दामोदर दास, आशा त्याग (42)

यह तन यह वन जमुन तट मिल्यौ वन्यौ है दाउ - श्री हित दामोदर दास, आशा त्याग (42)

यह तन यह वन जमुन तट, मिल्यौ वन्यौ है दाउ ।
तातै आशा छाड़िकै, जुगल किशोरहि गाउ॥

- श्री हित दामोदर दास, आशा त्याग (42)

यह मानव देह, तथा वृन्दावन में यमुना तट का वास मिलना अत्यंत दुर्लभ सौभाग्य है। अतः सांसारिक आशाओं को त्यागकर, युगल किशोर का निरंतर भजन करना चाहिए।