नित्यं भक्तपराधीना तेन राधा बिहारिणी।
साम्यं भजति भक्तेन रसे कृष्णेन लीलया ॥
- श्री वंशीअलि, श्री राधासिद्धांत (21)
श्री राधिका महारानी नित्य ही भक्त के आधीन हैं। श्री कृष्ण उनके अनन्य भक्त हैं, उनकी भक्ति के आधीन होकर, स्वामिनीजी समान भाव से, श्री कृष्ण के संग विहार करती हैं । अपने भक्त की रुचि के अनुसार ही स्वामिनी जी उस रस से ही भक्त को भी भजती हैं।
साम्यं भजति भक्तेन रसे कृष्णेन लीलया ॥
- श्री वंशीअलि, श्री राधासिद्धांत (21)
श्री राधिका महारानी नित्य ही भक्त के आधीन हैं। श्री कृष्ण उनके अनन्य भक्त हैं, उनकी भक्ति के आधीन होकर, स्वामिनीजी समान भाव से, श्री कृष्ण के संग विहार करती हैं । अपने भक्त की रुचि के अनुसार ही स्वामिनी जी उस रस से ही भक्त को भी भजती हैं।

