'छौना' छाँड़ि तू जगत को, श्याम सुमिर सुख लेह।
कुटुम्ब मित्र तेरे नहिं, जार करेंगे खेह॥
- श्री गुरु छौनाजी महाराज
गुरु छौना कहते हैं कि जगत की प्रीति को त्याग कर, अपना मन श्यामसुंदर में लगाओ क्योंकि सच्चा सुख केवल उनके स्मरण से ही मिलता है। परिजन और मित्र तुम्हारे मरने के बाद तुम्हारे साथ नहीं जा सकते और अंत में तुम्हारी देह भी जलाकर राख कर देंगे।
कुटुम्ब मित्र तेरे नहिं, जार करेंगे खेह॥
- श्री गुरु छौनाजी महाराज
गुरु छौना कहते हैं कि जगत की प्रीति को त्याग कर, अपना मन श्यामसुंदर में लगाओ क्योंकि सच्चा सुख केवल उनके स्मरण से ही मिलता है। परिजन और मित्र तुम्हारे मरने के बाद तुम्हारे साथ नहीं जा सकते और अंत में तुम्हारी देह भी जलाकर राख कर देंगे।

