कौन फिरत या विपिन राज में राधे राधे कहि टेरत - श्री लछिराम

कौन फिरत या विपिन राज में राधे राधे कहि टेरत - श्री लछिराम

(सवैया)
कौन फिरत या विपिन राज में, राधे-राधे कहि टेरत।
परम दुखित उन्मत्त भाव में, चहुँ दिसि चकित तुषातुर हेरत॥ [1]
सत्य कहो प्रिय सखा कौन हो, क्यों तुम नैंननि आँसू गेरत।
कृष्ण जीवनी कहा लगत है, जिनके जस की माला फेरत॥ [2]

- श्री लछिराम

श्री धाम वृन्दावन में श्री कृष्ण की श्री राधा नाम पुकार सुन, एक भक्त चकित होकर पूछता है -

यह कौन है जो श्री धाम वृन्दावन में “राधे राधे” पुकार करता हुआ विचरण कर रहा है? वह अत्यंत व्याकुल और उन्मत्त भाव में है, चारों दिशाओं में चकित होकर किसी को ढूँढता फिर रहा है। [1]

प्रिय सखा! सच-सच बताओ, तुम कौन हो? और तुम्हारी आँखों से आँसुओं की धारा क्यों प्रवाहित हो रही है? यह (राधा) तुम्हारी क्या लगती है, जिनके नाम की माला तुम निरंतर फेर रहे हो? [2]