गोरे मुख पै तिल बन्यों, ताहि करूँ मैं प्रणाम - ब्रज के दोहे

गोरे मुख पै तिल बन्यों, ताहि करूँ मैं प्रणाम - ब्रज के दोहे

गोरे मुख पै तिल बन्यों, ताहि करूँ मैं प्रणाम।
मानों चन्द बिछायकें, पौढे सालगराम॥

- ब्रज के दोहे

श्रीराधा के गोरे, सुंदर मुख पर जो तिल सुशोभित है, मैं उस तिल को प्रणाम करता हूँ। वह ऐसा प्रतीत होता है मानो चन्द्रमा पर अत्यन्त अद्भुत शालिग्राम-शिला प्रतिष्ठित हो।