विभचारनि कौ संग तजि - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (186)

विभचारनि कौ संग तजि - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (186)

विभचारनि कौ संग तजि, भजि अनन्य निहकाँम ।
श्रीबिहारीदास सुख में सुखी, दंपति रति धन धाँम ॥

- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (186)

यदि तुम व्यभिचारियों के संग को सर्वथा त्याग दो, एकमात्र निष्काम और अनन्य भाव से प्रिया-प्रियतम का भजन करो, केवल उनके सुख में ही सुखी रहो, तो तुम्हारे हृदय रूपी घर में श्री युगल का प्रेम रूपी धन भर जाएगा।