मनमोहन सम सुन्दर को है - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (4)

मनमोहन सम सुन्दर को है - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (4)

(राग मल्हार)
मनमोहन सम सुन्दर को है।
मैं अपने अनुमान कहूँ अब, उनकी पटतर और न सोहै॥ [1]
चितवन चपल रूप उजियारो, जाकों मुख नित चन्दहु जोहै।
नारायण जो एक दृष्टि में, सुर नर नाग सकल को मोहै॥ [2]

- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (4)

सखी के श्री राधा से वचन-
मनमोहन श्रीकृष्ण जैसा सुन्दर और कोई नहीं। मेरे अनुमान से तो उनकी समानता कोई दूसरा नहीं कर सकता। [1]

उनकी चंचल चितवन और उज्ज्वल रूप ऐसा है कि स्वयं चन्द्रमा भी प्रतिदिन उनके मुख को निहारता है। श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि उनकी एक ही दृष्टि में देवता, मनुष्य और नाग, सभी मोहित हो उठते हैं । [2]