(राग मल्हार)
निकुंज में ठाढ़े जुगल किसोर ।
गरबाहीं दियै दोऊ प्रीतम, आरस रंजित जागे भोर ॥ [1]
छाय रहीं घनघोर घटा अति, बिच बिच बोलत सुन्दर मोर ।
मधुरै राग मलारहि गावत, रूपमंजरी नंदकिसोर॥ [2]
- श्री रूप मंजरी
निकुंज में युगल सरकार, श्री राधा-कृष्ण युगल अत्यंत सुशोभित हैं, दोनों ने एक-दूसरे के गले में बाँहें डाल रखी हैं। आलस्य से भरी प्रभात बेला में वे जागे हैं, और उनके प्रेम की छाया से मानो भोर भी रंजित हो गई है। [1]
चारों ओर घनघोर घटा छा रही है, और बीच-बीच में सुन्दर मोर मधुर स्वर में बोल कर रहे हैं। ऐसे मनोहारी दृश्य में, नंदकिशोर-किशोरी की रूप मंजरी, राग मल्हार का मधुर गायन कर युगल को सुख प्रदान कर रही हैं। [2]
निकुंज में ठाढ़े जुगल किसोर ।
गरबाहीं दियै दोऊ प्रीतम, आरस रंजित जागे भोर ॥ [1]
छाय रहीं घनघोर घटा अति, बिच बिच बोलत सुन्दर मोर ।
मधुरै राग मलारहि गावत, रूपमंजरी नंदकिसोर॥ [2]
- श्री रूप मंजरी
निकुंज में युगल सरकार, श्री राधा-कृष्ण युगल अत्यंत सुशोभित हैं, दोनों ने एक-दूसरे के गले में बाँहें डाल रखी हैं। आलस्य से भरी प्रभात बेला में वे जागे हैं, और उनके प्रेम की छाया से मानो भोर भी रंजित हो गई है। [1]
चारों ओर घनघोर घटा छा रही है, और बीच-बीच में सुन्दर मोर मधुर स्वर में बोल कर रहे हैं। ऐसे मनोहारी दृश्य में, नंदकिशोर-किशोरी की रूप मंजरी, राग मल्हार का मधुर गायन कर युगल को सुख प्रदान कर रही हैं। [2]

