मेरे श्रीराधारमन, अति सरूप सुकमार ।
कोटि कोटि रति काम छबि, इन पर डारूँ बार ॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, षड्ऋतु शतक, दोहा (2)
मेरे श्री राधारमण अत्यंत सुंदर और सुकुमार अवस्था वाले हैं। उनके सौंदर्य की छवि ऐसी अनुपम है कि उस पर मैं कोटि-कोटि कामदेव और रति को भी बार-बार न्यौछावर कर दूँ।
कोटि कोटि रति काम छबि, इन पर डारूँ बार ॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, षड्ऋतु शतक, दोहा (2)
मेरे श्री राधारमण अत्यंत सुंदर और सुकुमार अवस्था वाले हैं। उनके सौंदर्य की छवि ऐसी अनुपम है कि उस पर मैं कोटि-कोटि कामदेव और रति को भी बार-बार न्यौछावर कर दूँ।

