चकित नैन कंपत हियौ, महा विरह की पीर।
असुअन मनौं झरना झरै, परयौ जमन के तीर॥
- श्री अलबेली अलि
श्री अलबेली अलि, श्री राधा के दर्शन की व्याकुलता में अपने विरह की दशा का वर्णन करती हैं— “नयन अचंभित हैं, हृदय और शरीर में निरंतर कंपन हो रहा है। अश्रुधारा ऐसे प्रवाहित हो रही है मानो कोई झरना फूट पड़ा हो और वे यमुना तट पर श्री किशोरी जी के चिंतन में बेसुध पड़ी हुई हैं।”
असुअन मनौं झरना झरै, परयौ जमन के तीर॥
- श्री अलबेली अलि
श्री अलबेली अलि, श्री राधा के दर्शन की व्याकुलता में अपने विरह की दशा का वर्णन करती हैं— “नयन अचंभित हैं, हृदय और शरीर में निरंतर कंपन हो रहा है। अश्रुधारा ऐसे प्रवाहित हो रही है मानो कोई झरना फूट पड़ा हो और वे यमुना तट पर श्री किशोरी जी के चिंतन में बेसुध पड़ी हुई हैं।”

