पंथ प्रेम को अटपटो, कोइ मन जानत पीर ।
कै मन जानत आपनो, कै लागो जेहिं पीर॥
- श्री दयाबाई
प्रेम का पंथ अत्यंत अटपटा और सबसे निराला है। इसकी अनोखी मधुर पीर को वही जानता है, जो स्वयं उस पीड़ा से घायल हुआ हो अर्थात् जिसके हृदय ने उस वेदना का अनुभव किया हो।
कै मन जानत आपनो, कै लागो जेहिं पीर॥
- श्री दयाबाई
प्रेम का पंथ अत्यंत अटपटा और सबसे निराला है। इसकी अनोखी मधुर पीर को वही जानता है, जो स्वयं उस पीड़ा से घायल हुआ हो अर्थात् जिसके हृदय ने उस वेदना का अनुभव किया हो।

