ब्रज की तोय लाज मुकुट वारे।
चंदा-सूरज तेरौ ध्यान धरत हैं, ध्यान धरत नौलख तारे॥ [1]
इन्द्र नें कोप कियौ ब्रज ऊपर, तब गिरिवर कर पर धारे।
'पुरुषोत्तम' प्रभु की छवि निरखत, गाय-गोप के रखवारे॥ [2]
- श्री पुरुषोत्तम जी
हे गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण! ब्रज की लाज और प्रतिष्ठा तुम्हारे ही करकमलों में है। चंद्रमा और सूर्य भी तुम्हारे ही ध्यान में निमग्न रहते हैं, और आकाश के नौ लाख तारे भी निरंतर तुम्हारे ही सौंदर्य को निहारते हैं। [1]
जब इन्द्र ने क्रोधित होकर ब्रज में भारी वर्षा की, तब तुमने गिरिराज को करकमलों पर धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की। श्री पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण, जो गायों और गोपों के रक्षक हैं, उनकी छवि को सभी सदा निहारते रहते हैं। [2]
चंदा-सूरज तेरौ ध्यान धरत हैं, ध्यान धरत नौलख तारे॥ [1]
इन्द्र नें कोप कियौ ब्रज ऊपर, तब गिरिवर कर पर धारे।
'पुरुषोत्तम' प्रभु की छवि निरखत, गाय-गोप के रखवारे॥ [2]
- श्री पुरुषोत्तम जी
हे गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण! ब्रज की लाज और प्रतिष्ठा तुम्हारे ही करकमलों में है। चंद्रमा और सूर्य भी तुम्हारे ही ध्यान में निमग्न रहते हैं, और आकाश के नौ लाख तारे भी निरंतर तुम्हारे ही सौंदर्य को निहारते हैं। [1]
जब इन्द्र ने क्रोधित होकर ब्रज में भारी वर्षा की, तब तुमने गिरिराज को करकमलों पर धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की। श्री पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण, जो गायों और गोपों के रक्षक हैं, उनकी छवि को सभी सदा निहारते रहते हैं। [2]

