सकल विभव सारं सर्व धर्मैक सारं-सकल भजन सारं सर्वसिद्वैक सारम् ।
सकल महिम सारं वस्तु वृन्दावनान्तः सकल मधुरिमाम्भो राशि सारं विहारम्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (17.85)
सब वैभवों का सार, समस्त धर्मों का सार, समस्त भजन का सार, समस्त सिद्धियों का सार, समस्त महिमाओं का सार तथा समस्त माधुर्य एवं रसों का सार, श्री धाम वृन्दावन का नित्य विहार है।
सकल महिम सारं वस्तु वृन्दावनान्तः सकल मधुरिमाम्भो राशि सारं विहारम्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (17.85)
सब वैभवों का सार, समस्त धर्मों का सार, समस्त भजन का सार, समस्त सिद्धियों का सार, समस्त महिमाओं का सार तथा समस्त माधुर्य एवं रसों का सार, श्री धाम वृन्दावन का नित्य विहार है।

