गोपी प्रेम प्रसाद सो, हौ ही सीख्यौ आय ।
ऊधौ तें मधुकर भयौ, दुबिधा जोग मिटाय॥
- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भँवर गीत (68.2)
गोपियों के निष्काम प्रेम के प्रभाव एवं कृपा प्रसाद से आज उद्धव जैसे ब्रह्मज्ञानी भी, ज्ञान/योग की सब दुविधाएँ मिटाकर, प्रेम-मार्गी रसिक हो गए।
ऊधौ तें मधुकर भयौ, दुबिधा जोग मिटाय॥
- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भँवर गीत (68.2)
गोपियों के निष्काम प्रेम के प्रभाव एवं कृपा प्रसाद से आज उद्धव जैसे ब्रह्मज्ञानी भी, ज्ञान/योग की सब दुविधाएँ मिटाकर, प्रेम-मार्गी रसिक हो गए।

